Archive for the 'Ghanshyam Thakkar' Category
हमारी प्राथमिक शालामें कई अभिप्रेरक कविताएं पढनेकी/गानेकी परंपरा थी. आयु के उस सूर्योदय कालमें कुछ ऐसे काव्य गाये, अपनाये, जिनका प्रकाश आज तक जीवनपथको ज्योतिमान करता रहा है. गुरुदेव रबीन्द्रनाथ टैगोरकी इस कविताका अनुवाद गांधीजीके निकटतम अनुयायी श्री महादेव देसाईने किया था. मैंने उस अनुवादका हिन्दी भाषांतर उसी लयमें किया है. आशा है आपको पसंद आयेगा.
घ. ठ.
चल तू अकेला – रवींद्रनाथ टैगोर
(गीत)
बंगाली-गुजराती भाषांतर : महादेवभाई देसाई
गुजराती-हिन्दी भाषांतर : घनश्याम ठक्कर
02
Oct
09
घूमता है (गझल) – घनश्याम ठक्कर
संगीतः: घनश्याम ठक्कर
गीतः लोकगीत और घनश्याम ठक्कर
स्वरः जयश्री भोजविया और साथी